Thursday, March 7, 2019

पहलवान धर्मेंद्र दलाल पर विशेष

आज मै आपको रूबरू कराऊगॉ पहलवान धर्मेंद्र दलाल से पहलवान जी मेरे गोति भाई भी है। लेकिन बडे दिनो से मै उन पर नही लिख पाया था । आज लिख रहा हू जानते है पहलवान जी के बारे मे -


 धर्मेंद्र  दलाल  

चौधरी धर्मेंद्र दलाल का जन्म हरियाणा के ग्राम मण्डोठि मे छारा के पास सन 1984 मे हुआ था । पहलवान धर्मेंद्र  दलाल के पिता का नाम चौधरी सुबे सिंह और माता का नाम चन्द्री  देवी है। हरियाणा का यह क्षेत्र जहॉ पर धर्मेंद्र  दलाल का जन्म हुआ वहॉ पर कुस्ती का शौक बहुत पुराना है। धर्मेंद्र  पहलवान का बडा भाई सोनू पहलवान भी बहुत बडा पहलवान  रहा है। (सोनू पहलवान जी पर मै बाद मे अलग से प्रकाश डालूगॉ )


कुस्ती के क्षेत्र मे पदार्पण

धर्मेंद्र  दलाल अपने बडे भाई सोनू की पहलवानी से प्रभावित होकर ही कुस्ती के क्षेत्र मे आये थे । सोनू पहलवान गुरू द्रोणाचार्य कैप्टन चॉदरूप के अखाडे जो आजादपुर मे स्थित है मे अभ्यास किया करते थे । पन्द्रह वर्ष की आयु मे धर्मेद्र दलाल अपने भाई सोनू के पास गुरू कैप्टन चॉदरूप अखाडा मे चले गये । यही से धर्मेंद्र  दलाल का कुस्ती के क्षेत्र मे पदार्पण हुआ ।


पिता सुबे सिंह की वजह से मिलती रही प्रेरणा

धर्मेंद्र  दलाल पहलवान पुराने दिनो को याद कर बताते है कि मै अपने भाई हिन्द केसरी सोनू के साथ पहलवान बनने के रास्ते पर चल पडा था । पहलवानी मे खर्च बहुत आता है। जब एक किसान परिवार को दो - दो पहलवानो का खर्च उठाना पडे तो मुशकिल दौर को आप बखुबी समझ सकते है। मुझे याद है। मेरा पिताजी हम दोनो भईयो के लिये रोजाना तीन तीन बसें बदलकर  अखाडे मे दूध लेकर आते थे , गर्मी हो या बरसात पिताजी हमेशा अपनी डयूटी पर डटे रहे । कई बार पिताजी बारिश मे भीगते हुये आते थे । समय गुजर गया लेकिन लगता है कि कल की बाते है।


द्रोणाचार्य कैप्टन चॉदरूप से जुडी यादे

धर्मेंद्र कहते है कि गुरू जी जो अखाडे मे नया लडका आता था ,उसे गाली बहुत देते थे । जब कोई गलती करता तो लठ भी मारते थे कोई चू  चपट तक  नही करता था । गुरू जी पहचान लेते थे कि कौन पहलवान बन सकता है। नियम और अनुशासन गुरू जी का बहुत सक्त रहता था । उस दौर मे क्रीकेट मैच का बडा चलन होता था । यदि गुरू जी को पता चल गया कि लडके मैच देख रहे है। तो कमरे मे घुसकर मारते थे । मुझे याद है , मै जब कई मेडल जीत चुका था तब भी अखाडे से बहार पैर रखता हुआ डरा करता था , कि कही गुरू जी ना आ जाये । एसा अनुशासन होता था । अब जमाना बदल रहा है , कोई गुरू की सुनने को तैयार नही यही कारण है कि लडके मार्ग भटक कर पिछड जाते है। पहलवान नही बन पाते ।


बीमारी के दिनो मे भी चॉदरूप ने धर्मेंद्र  दलाल को दिया था आशिर्वाद

यह बाते कैप्टन चॉदरूप जी की बीमारी के दिनो की है। कैप्टन सहाब के पास उनके कई सारे शिष्य उनका हाल चाल जानने के लिये आये हुये थे । धर्मेंद्र  दलाल भी उनके पास बैठे थे तब चॉदरूप जी ने कहा था कि मेरा शिष्य धर्मेंद्र  एसा शिष्य रहा है। जिसने कभी भी मुझे किसी काम को मना नही किया ।  कभी किसी काम से मुह नही चुराया , कभी जीवन मे मना करना तो सीखा ही नही । गुरू जी ने अपने पास बुला आशिर्वाद दिया था। धमेन्द्र दलाल बताते है कि हम गुरू जी को सहाब जी कहा करते थे । गुरू जी से जुडी हर एक बात आज भी याद है। लेकिन संसार का नियम है कि बीता हुआ समय वापिश नही आ सकता ।


उपलब्धियॉ

पहलवान धर्मेन्द्र दलाल ने भारत  मे केवल एक बार हुये ग्रीको रोमन के टाईटल रूस्तमे हिन्द मे हिस्सा लिया था , उस समय फाईनल मे धमेन्द्र दलाल का मुकबला जार्जिया के पहलवान से हुआ और धमेन्द्र दलाल ने विजय हासिल की तथा रूस्तमे हिन्द का मुकाबला अपने नाम किया था । पहलवान धमेन्द्र दलाल ने 40 से ज्यादा बार भारत  का  प्रतिनिधित्व विदेशो मे किया । अनेको मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। कोमनवेल्थ मे 1 गोल्ड, 2 सिलवर , 1 ब्रोन्ज और एशिया चैम्पियनशिप मे सिलवर के साथ साथ अनेको मेडल पहलवान ने अपने नाम किये है।


अर्जुन अवार्ड से जुडी यादे

पहलवान धर्मेन्द्र दलाल बताते है कि जब मुझे अर्जुन अवार्ड के मिलने की घोषणा हुई तब मुझे और मेरे चहाने वालो को बडी खुशी हुई , मै  अपने गुरू कैप्टन चॉदरूप के पास गया और उन्हे मैने बताया कि मुझे अर्जुन अवार्ड मिल रहा है। जिस दिन अर्जुन अवार्ड मिलेगा उस दिन मेरे साथ चलना है। उस समय प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे । साल 2013 था । लेकिन गुरू जी बीमार थे , गुरू जी ने कहा कि मै बीमार हु बेटा मै तेरे साथ नही जा सकता,  तू आज सबसे पहले मेरे पास आया मेरे लिये यही बहुत बडी बात है। गुरू जी ने आगे कहा की तुझे अब जो सबसे प्यारा लगता हो उसे अपने साथ जे जाना । धर्मेंद्र  कहते है कि मेरे पिता का स्वर्गवास हो चुका था । मैने अपनी मॉ को ले जाने का फैसला लिया जब राष्ट्रपति द्वारा मुझे अर्जुन अवार्ड दिया जा रहा था , मॉ की ऑखे खुशी मे भर आई थी।


दलाल खाप से एक मात्र अर्जुन अवार्डी है धर्मेंद्र  पहलवान

बहुत कम लोग जानते होगे कि धर्मेंद्र  पहलवान दलाल गोत्र से और दलाल खाप से एक मात्र खिलाडी है जो अर्जुन अवार्डी है। दलाल खाप से धमेन्द्र को छोडदे तो कोई दूसरा अर्जुन अवार्डी इस खाप मे नही है। मै सामाजिक संगठनो को धर्मेद्र दलाल के लिये ही नही सभी खिलाडियो के लिये कहना चहाता हू कि इन लोगो को समय समय पर सम्मानित करना चाहिये । जिससे आने वाली पीढि इनका अनुसरण कर सके ।

डाईट के उपर धर्मेंद्र  दलाल के विचार

पुराने दिनो को याद कर धर्मेंद्र  कहते है कि हमारे समय मे हम तो  केवल दूध ,घी ,बदाम, मुनाक्का, फल, जूस, दाल जैसी सामान्य चीजो का ही अनुशरण करते थे । अब जमाना बदल रहा है। लोग एक दम से मेडल प्राप्त करना चहाते है। जबकि जल्द बाजी हानीकारक ही होती है।


नये पहलवानो को धर्मेंद्र  दलाल के सुझाव

यदि किसी को पहलवान बनना है तो अपने कोच , अपने गुरू का आदर करना सीखना होगा , उनके बताये रास्ते पर चलना होगा । उनके द्वारा बोली गई कडवी बातो का मलाल नही करना चाहिये । इनके बताये गये जो भी वर्क आउट है। उन्हें  फोलो करना होगा । तब आपको सफलता मिलेगी , अन्यथा नही  । छः फुट 2 ईच लम्बे और सौ किलो से ज्यादा वजन के धर्मेंद्र दलाल पहलवान की शादी 2008 मे शशि कान्ता के साथ हो चुकी है। पहलवान जी के पास एक बेटी पायल और एक बेटा है जिसका नाम सचिन है।  पहलवान जी सादगी से रहना पसंद करते है , मिलनसार व्यक्तिव उनकी उपलब्धियो मे चार चॉद लगा देता है। पहलवान जी पहले फ्री स्टाईल की कुस्ती लडा करते थे बाद मे कमर दर्द की वजह से गुरू चॉद रूप के कहने पर ग्रीको रोमन मे लडने लगे । धर्मेंद्र  दलाल आज देश के नामवर पहलवानो मे से एक है।


धर्मेंद्र दलाल अखाडे का करते है संचालन 

वर्तमान मे पहलवान धर्मेंद्र दलाल अपने बडे भाई सोनू हिन्द केसरी के नाम से अखाडे का संचालन करते है। धर्मेंद्र चहाते है। कि  युवा वर्ग को एक एसा माहोल मिले जिससे वे सही मार्ग पर चलकर देश प्रदेश का नाम रोशन कर सके ।

याद आ जाते है पुराने दिन 

धर्मेंद्र  दलाल कहते है कि जब आज भी कभी गुरू जी कैप्टन चॉदरूप के अखाडे मे जाता हू तो वर्तमान संचालक भी अमित ढाका (गुरू जी के पोते ) की और से बहुत आदर सत्कार मिलता है। सभी पुरानी यादे ताजा हो जाती है। धमेन्द्र कहते है की मै तो गर्व करता हू की हमे गुरू के साथ समय बीताने का मौका मिला,  उनसे कुछ सीखने का मौका मिला वह दौर भी सुनहरी दौर था ।

Date 08-03-2019
रविन्द्र शामली
कुस्ती जगत 

Sunday, March 3, 2019

चौधरी युधिष्ठिर पहलवान पर विशेष

चौधरी युधिष्ठिर पहलवान

पचैण्डा कला का इतिहास

उत्तर प्रदेश मे एक गॉव है। जिसको पचैण्डा कला के नाम से जाना जाता है। यह गॉव जिला मुजाफ्फरनगर के पास मे स्थित है। हजारो साल पुराने इस गॉव का इतिहास देखे तो यह गॉव महाभारत काल से अपना इतिहास समेटे हुये है। कहा जाता है कि यहॉ पर महाभारत काल मे भी कुस्ती का एक अखाडा हुआ करता था । उस अखाडे मे  पॉच हजार साल पहले पॉचो पाण्डव युधिष्ठिर , भीम , अर्जुन , नकुल सहदेव  भी आये थे । जिसके बाद से ही इस गॉव को पचैण्डा के नाम से जाना जाने लगा था ।


पहलवान युधिष्ठिर के परिवार पर एक नजर 

अपने इतिहास और गॉव से अपार लगाव होने के चलते इस गॉव के चौधरी धर्मबीर सिंह ने अपने पॉच बेटो के नाम महाभारत के पाण्डवो के नाम पर रख दिये थे । चौधरी धर्मबीर सिंह पूर्व प्रधान  ने अपने सबसे बडे बेटे का नाम अर्जुन , दूसरे बेटे का नाम भीम , तीसरे बेटे का नाम नकुल , चौथे बेटे का नाम शहदेव और पॉचवे बेटे का नाम युधिष्ठिर रखा था । चौधरी धर्मबीर सिंह ने अपनी सबसे बडी बेटी का नाम कामेश रख दिया था  । चौधरी धर्मबीर सिंह अपने तीन भाईयो मे से एक है। धर्मबीर सिंह के एक भाई का नाम अजब सिंह व दूसरे भाई का नाम मॉगेराम है। चौधरी धर्मबीर सिंह के पिता श्री रघुबीर सिंह भी अपने समय मे पहलवान रहे है।

चौधरी धर्मबीर की मॉ हुशयारी देवी भी पहलवान परिवार  से नाता रखती है। हुशयारी देवी मीरापुर दलपत ग्राम (जानसठ के निकट) के जाने माने पहलवान चौधरी मलखान सिंह की पुत्री थी ।


गुरू हनुमान अखाडे की शरण मे युधिष्ठिर 

चौधरी धर्मबीर सिंह के छोटे बेटे युधिष्ठिर साल 1995 मे गुरू हनुमान अखाडे मे पहलवानी सीखने के लिये गये । युधिष्ठिर के साथ भाई (चाचा मांगेराम का लडका ) अरूण भी गुरू हनुमान अखाडे मे रहकर पहलवानी किया करता था । युधिष्ठिर पहलवान नेशनल लड चुके थे । लेकिन युधिष्ठिर का कुछ दिन बाद गम्भीर ऐक्सिडेन्ट  हो गया था । जिससे उनकी पहलवानी प्रभावित होनी स्वभाविक थी ।


दो राहे पर युधिष्ठिर पहलवान 

कुछ ही दिन बीते थे कि  पहलवान युधिष्ठिर के भाई अरूण (मागेराम चाचा के लडके   ) की दो सूटरो ने गोलियॉ बरसाकर हत्या करदी थी उन दोनो सूटरो को गॉव वालो ने मौके पर पकडकर मार डाला था। लेकिन जिसने हत्या कराई थी। वह युधिष्ठिर के गॉव का ही एक व्यक्ति था । जो बाद मे मारा गया था । उस केस  मे पहलवान युधिष्ठर व पहलवान युधिष्ठर के अन्य भाईयो के खिलाफ नामजद रिपोर्ट हो गई । युधिष्ठिर को भी भाईयो के साथ जेल जाना पडा कोई पैरवी करने वाला ना होने के चलते पहलवान युधिष्ठिर जेल मे न्याय ना मिलने के कारण परेशान हो उठे थे । एक दिन जेल मे एक घटना घटी पहलवान युधिष्ठिर को सपने मे शिव शंकर भोले नाथ ने दर्शन दिये और कहा कि जेल से निकल युधिष्ठिर तुझे तो खेल के क्षेत्र मे बहुत कार्य करने है। सपने मे दिखाई दिये भोले नाथ से प्रभावित हो पेशी पर जाते वक्त भोला भाला पहलवान युधिष्ठिर पुलिस वालो से छूटकर भाग गया । यह खबर आग की तरह फैली जिसके परिणाम स्वरूप पहलवान युधिष्ठिर पर 50000 हजार रू0 का इनाम पुलिस की ओर से रख दिया गया जब यह खबर पहलवान युधिष्ठिर ने पढी तो पहलवान युधिष्ठिर को बहुत दुख हुआ । हालातो की मार ने युधिष्ठिर पर बदमाशी का ठप्पा जो लगा दिया था ।


पहलवान युधिष्ठिर का जेल मे सरेण्डर 

 युधिष्ठिर का जेल मे किरदार एक जमाने के सुपर स्टार धमेन्द्र की तरह था । धर्मेन्द्र सहाब कैमरे के सामने फिल्मो मे किरदार निभाते थे । किरदार मे सब कुछ नकली होता था , लेकिन युधिष्ठिर जो करता था वो सच होता था । युधिष्ठिर गुरू हनुमान के शिष्यो मे से एक है। जब पहलवान युधिष्ठिर के भाई जेल से बहार आये तब युधिष्ठिर ने आत्म समर्पण कर दिया । जब जेलर को किसी ने बताया की पहलवान जी बहुत खतरनाक आदमी है। यही कारण था कि युधिष्ठिर को बहुत कडी सिक्योरिटी मे रखा गया था । युधिष्ठिर यह सब देखकर आश्चर्यचकित था कि यह हो क्या रहा है। क्योकि युधिष्ठिर अपने को एक आम इन्सान मानता था जबकि अधिकरी लोगो की नजरो मे युधिष्ठिर एक हिस्टरी सीटर था । एक दिन पहलवान युधिष्ठिर ने जेलर से मिलने की इच्छा जताई । युधिष्ठिर की इच्छा को जेलर ने गम्भीरता से लिया और युधिष्ठिर से बात की,  युधिष्ठिर ने सारी बाते जेलर को बताई तथा अपने आपको आन्तकवदियो की तरह रखे जाने पर नाराजगी भी जताई । इसके बाद जेलर ने भी पहलवान के अन्दर के नरम दिल  इंसान को पहचान ने मे देर ना लगाई । पहलवान युधिष्ठिर से पूछा गया  कि कैसी जगह रहना चहाते हो , तो युधिष्ठिर ने एकान्त मे तनहाई की मांग की जिसे मान लिया गया । युधिष्ठिर को एकान्त मे तनहाई दे दी गई


असहाय के लिये जेल मे देवता बने युधिष्ठिर

जेल मे एक बाप और बेटा किसी केस मे बन्द थे  जेल मे बन्द हट्टे कट्टे युधिष्ठिर को हर कोई एक बार देखकर चलता था । कई बार किसी की  जब जेल मे नही सुनी जाती थी तो वो युधिष्ठिर से आश लगा लेता था । जेल मे बन्द युधिष्ठिर कई बार लोगो की समस्या को देख स्वम दुखी हो जाता था । एक दिन  जेल मे बन्द एक लडके ने युधिष्ठर के आकर पैर पकड लिये और रोने लगा , लडके ने कहा कि मेरा बाप यही पर बन्द है। डाक्टर ना तो सही से इलाज कर रहा और ना ही बहार इलाज करवाने के लिये लिखकर दे रहा है। लडके के पिता की उम्र 60 साल के आस पास   थी । बाप बेटे  की लाचारी को देखकर युधिष्ठिर ने खूब गुहार लगाई लेकिन आज शाम तक बहार इलाज की प्रमीशन देगे या कल शाम तक बहार इलाज के लिये प्रामीशन देगे जैसे आशवासन मिलते रहे । एक दिन बुढे बाप के बेटे ने युधिष्ठिर को जगाया और रोते हुये बताया की मेरा बाप मर गया पहलवान जी , युधिष्ठिर को बहुत दुख हुआ । अगले ही दिन युधिष्ठिर पहलवान की पेशी थी जैसे ही पुलिस कर्मी युधिष्ठिर को पेशी पर ले जाने लगे तो सामने से डाक्टर आ गया । युधिष्ठिर ने डाक्टर को धप्पड मार दिया और पूछा की उस बुढे व्यक्ति को जिन्दा करने की ओकात है जो तेरी वजह से मारा गया , लेकिन डाक्टर युधिष्ठिर को देख लेने की धमकी देने लगा ,  युधिष्ठिर ने डाक्टर को पकडकर लात घुस्सो से कुत्ते की तरह पीटा छूट छुटा हो गई डाक्टर ने एक मुकदमा युधिष्ठिर पर कर दिया । दूसरी और उस बृद्ध के बेटे ने अधिकारीयो के सामने युधिष्ठिर को साक्षात देवता बताया था ।

पहलवान युधिष्ठिर के जेल मे रिसर्च -ः 

पहलवान युधिष्ठिर जेल मे रहते हुये मानशिक तनाव से बचने के लिये अपने आपको व्यस्त रखते थे । पहलवान जी ने देखा की जेल मे कुछ मानशिक रोगी भी बन्द है। पहलवान जी ने इस विषय पर रिसर्च सुरू किया और पाया की ये लोग शहर मे लोगो को प्रेशान करते थे , लोगो ने शिकायत की तो पुलिस ने यहॉ बन्द कर दिया पहलवान जी इन लोगो को खाने की चीजे देने लगे फिर खेल के नाम पर इनसे पीटी कराने लगे , दौड  कराने लगे  ऐसा करने पर जो लोग मानसिक समस्या से जूझ रहे थे । उन्हे भूख  लगने लगी और थककर  नीदं आने लगी , कई लोग ठीक होने लगे । युधिष्ठिर के इस चमत्कार का जेल प्रशासन कायल हो गया । इस चमत्कार का ही असर था कि युधिष्ठिर को डी0 आई 0जी0 पाण्डे और जेलर ने जेल के अन्दर सम्मानित किया था ।


न्यायाल्य मे युधिष्ठिर ने स्वम करी थी अपनी बहस 

 जिस न्यायाल्य मे पहलवान युधिष्ठिर के मुकदमे की बहस चला करती वहॉ पर रमा जैन नाम की महिला जज हुआ करती थी । ये बाते साल 2013 की है। युधिष्ठिर ने अपने मुकदमे मे स्वम बहस करने की अनुमति मागी थी ,  युधिष्ठिर को इजाजत दी गई , भरी अदालत मे पहलवान युधिष्ठिर ने चीख चीखकर अपने हालतो और घटनाओ से जज को रूबरू करवाया साथ ही यह थी बताया कि मै कोई बदमास नही खिलाडी हू , मुझे जबरदस्ती बदमाश बनाया जा रहा है। मै बदमाश नही बनना चहाता । पुलिस से छूटकर भागने के सावल पर युधिष्ठिर का कहना था कि मै परिवार की पैरवी के लिये भागा था । आज सरेण्डर भी कर दिया है। जेल से छूटने के बाद युधिष्ठिर ने जज को अखाडा चलाने की बात कही थी। युधिष्ठिर आज भी अपनी बात पर कायम है। और अपने अखाडे और समाज सेवा को माध्यम बनाकर युवाओ का भविष्य बनाने मे जुटे है।


युधिष्ठिर का सच्चा प्यार

समय के साथ साथ जेल का अध्याय बन्द हो गया युधिष्ठिर पहलवान ने अपने अखाडे पर सकारात्मक कार्य सुरू कर दिया था । दूसरी और जेल मे युधिष्ठिर की चर्चा होती थी कई अधिकारी कहते  कि क्या शानदार लडका था । जेल मे रहते हुये भी जेल के अन्दर  कितना सुधार कर गया । एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की बेटी डा0 मोनिका सिंह (इण्टर कॉलिज मे लेकचरार) ने भी युधिष्ठिर की बहादुरी के कई किस्से सुन रखे थे । एक बार इत्फाक से डाक्टर मोनिका सिंह की मुलाकात पहलवान युधिष्ठिर से हुई ऑख मिली और दिल धडका , दोने के दिलो मे प्यार के अंकुर फूटने लगे , दूसरी और डा0 मोनिका सिंह के लिये कई इंजीनियर और डाक्टर के रिस्ते आया करते थे । लेकिन डाक्टर मोनिका सिंह ने सभी डाक्टर , इंजीनियरस के आये रिस्तो को कैंसिल कर दिया था  । क्योकि मोनिका सिंह युधिष्ठिर को पसंद करने लगी थी । युधिष्ठिर पहलवान ने डा0 मोनिका सिंह के साथ साल 2016 मे शादी कर ली थी। सायद युधिष्ठिर और मोनिका सिंह एक दूसरे के लिये ही बने थे । डाक्टर मोनिका सिंह का कहना था कि युधिष्ठिर जितने गुण किसी मे आसानी से नही मिलते । चौधरी युधिष्ठिर कहते है कि प्यार किया तो डरना क्या,  या तो किसी से प्यार ना करो , यदि करो तो तो फिर उससे शादी करो ।


युधिष्ठिर की पत्नी डाक्टर मोनिका सिंह  -

डाक्टर मोनिका सिंह का जन्म 30 जून सन् 1986 को बिजनोर जनपद मे श्री धर्म सिंह (डिप्टी एसपी)के घर मे हुआ था । डाक्टर मोनिका सिंह समाज सेवा के साथ साथ राजनिति मे भी सरोकार रखती है। डाक्टर मोनिका सिंह एक पढी लिखी महीला है। जो एम0 ए0 , बी0एड0, पी0एच0डी0 , और नैट पास है। डाक्टर मोनिका सिंह 2013 मे पी0सी0एस0 का प्री टेस्ट भी क्वालीफाई कर चुकी है।  यही नही डाक्टर मोनिका सिंह पढाई के क्षेत्र मे झण्डे गाडने के अलावा वॉलीवाल की राष्टीय चैम्पियन रह चुकी है। डाक्टर मोनिका सिंह को बचपन से ही राजनितिक लगाव रहा है। डाक्टर मोनिका सिहं शिक्षक नेता के रूप मे अपनी पहचान बनाने के साथ साथ 2014 मे एम0 एल0 सी0 का चुनाव लड चुकी है। वर्तमान मे मोनिका सिंह भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता है। अपने पति युधिष्ठिर के साथ साथ मोनिका सिंह का समाज सेवा मे बडा योगदान रहता है। यही नही मोनिका सिंह उत्तर प्रदेश मे महिला विंग अखिल भारतीय विमुक्त एवं घुमन्तु जाति वेलफेयर संघ की अध्यक्ष है और गॉव पचैण्डा कला मे शहीद बचन सिंह व स्वर्गीय अरूण पहलवान अखाडा की उपाध्यक्ष है। जानसठ इण्टर कॉलिज मे लेक्चरार है।


 डाक्टर मोनिका सिंह का सपना

डाक्टर मोनिका सिंह का सपना है कि देश से जातिवाद पूर्णतः समाप्त हो सभी को एक  सी समानता   समाज और कानून की नजरो मे प्राप्त हो । क्योकि जातिवाद  समाज की जडो को खोखला करने का काम करता है। यदि जातिवाद  समाप्त हो जाये तो देश और ज्यादा तरक्की कर सकता है।


पहलवान युधिष्ठिर और उनकी पत्नी डाक्टर मोनिका सिंह मे कूट कूट कर भरी है समाज सेवा 

ग्राम पचैण्डा कला मे पहलवान युधिष्ठिर की लग्न और परिश्रम से शहीद बचन सिंह व स्वर्गीय अरूण पहलवान नामक अखाडा उचाईया छू रहा है। इस अखाडे को इस उचाई पर ले जाने मे पहलवान युधिष्ठिर को बहुत पापड बेलने पडे है। अखाडा साई से अडोप हो चुका है। मैट, जिम , मिट्टी का अखाडा जैसी सभी सुविधाये मौजूद है। लडकियो के लिये अलग होस्टल पर काम चल रहा है। इस अखाडे के अध्यक्ष युधिष्ठिर के बडे भाई चौधरी अर्जुन पहलवान है। अखाडे का संचालन पहलवान जी युधिष्ठिर के चाचा श्री मांगेराम जी करते है। पहलवान युधिष्ठिर की पत्नी डा0 मोनिका सिंह इस अखाडा की उपाध्यक्ष है। जो समाज के उज्जवल भविष्य के लिये समाज सेवा मे लगातार प्रायत्नशील रहती है।


रविन्द्र शामली
कुस्ती जगत 

Wednesday, February 6, 2019

श्री राजन पहलवान (भारत केसरी)


उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के गॉव लोयन मलकपुर मे पहलवान राजन तोमर का जन्म 08-05 -1995 को हुआ था । पहलवान राजन के पिता का नाम श्री सुदेश कुमार और माता का नाम श्रीमती मन्जु देवी है। पहलवान राजन तोमर ने 12 तक की शिक्षा प्राप्त की है। इसी गॉव के सुभाष वर्मा पहलवान ने एक समय अपनी पहलवानी से बडी प्रसिद्धि पाई थी । जिसके बाद इस गॉव से अनेको पहलवान निकलकर सामने आये , कई अर्जुन अवार्ड इस गॉव की झोली मे आ चुके है। राजन पहलवान भी अपने गॉव के बडे पहलवानो को देखकर पहलवानी मे आने का मन बचपन मे ही बना चुके थे । हालाकि राजन के चाचा श्री तेजबीर ने राजन के अन्दर के खिलाडी को सुरूवात मे ही पहचान लिया था । यही कारण है की राजन पहलवान अपनी पहलवानी मे अपने चाचा का सबसे बडा योगदान मानते है और कहते है की यदि मेरा चाचा श्री तेजबीर ना होता तो मै सायद कभी पहलवान ना बन पाता । एक तरह से कह सकते है कि पहलवान राजन की पहलवानी मे उनके चाचा का सुरू से ही बडा योगदान रहा है । राजन पहलवान ने अपनी पहलवानी की सुरूवात अपने गॉव मलकपुर के विजय पाल खलीफा के अखाडे से की थी , यही पर राजन पहलवान दों साल तक मेहनत करते रहे ।  इसके बाद तीन साल तक अपने गॉव के ही इकबाल खलीफा के यहॉ अखाडे मे आगे बढने के लिये मेहनत करते रहे , लेकिन यहॉ पर मैट उपलबध नही था । आगे बढने के लिये मैट की अनदेखी करना राजन पहलवान के  लिये आत्मघती कदम से कम ना था । इसलिये राजन ने गॉव छपरौली के श्री किरशन खलीफा के अखाडे का रूख किया क्योकि वहॉ पर मैट की व्यवस्था उपलब्ध थी । और यह अखाडा राजन पहलवान के गॉव से ज्यादा दूर नही था । आने जाने के लिये परिवहन के साधन भी भरपूर मात्रा मे उपलब्ध थे । राजन दिन रात आगे बढ रहा था । यही पर मेहनत करते - करते  राजन पहलवान स्पोर्ट कोटे से 07 मार्च 2016 मे आर्मी मे भर्ती हो गये । 

डाईट - 

1- राजन पूरे दिन मे दो बार मे  10 लीटर दूध पी जाते है यदि दूध घर का है। बहार के दूध को राजन कम मात्रा मे लेते है।
2-  दिन मे एक बार मूगं की दाल का हलवा 
3- दिन मे एक बार जूस पीते है। डैड से दो लीटर 
4- सुबह शाम की बात करे तो दिन मे दो दर्जन केले  राजन पहलवान खाते है। 
5- एक दिन मे 500 ग्राम देशी घी का सेवन 
6- 300 ग्राम बदाम की गिरी घोटकर  राजन पी जाते है। 
7- दिन मे मुनाक्कखा का पानी तीन बार पीते है। 

 वर्कआउट

राजन पहलवान दिन मे सबसे ज्यादा समय टेक्निक लगाने मे और जोर करने मे खर्च करते है। 

उपलब्धी

2012 - स्कूल नेशनल मे कास्य 
2014 - आलइण्डिया यूनिवर्सिटी मे ब्रोन्ज
2015- नेशनल गेम्स मे सिलवर 
2016- मे स्पोर्ट कोटे से आर्मी मे भर्ती 
2016- वर्ल्ड आर्मी गेम्स मे पार्टीसपेट
2018- सीनियर मिट्टी नेशनल गेम्स मे सिलवर 
2019- भारत केसरी (बेल गॉव कृनाटक मे 28-01-2019 को बने )

राजन भारत केसरी एक युवा पहलवान है। जो भविष्य मे और भी कई मेडल देश को देने का दम रखता है। राजन 125 से 130 किलो मे फ्रिस्टाईल कुस्ती लड़ता है। राजन के पिता श्री सुदेश कुमार का कहना है कि राजन ने बहुत मेहनत की जिसका फल राजन को मिला है। हर मॉ बाप की तरह मुझे खुशी है की बेटा अब सही मायने मे कामयाब हो गया है। श्री सुदेश कुमार युवाओ के लिये संदेश देते है और कहते है कि युवाओ को नशे से दूर रहने की आवश्यक्ता है। वरना जीवन और घर दोना बर्बाद हो जाते है। 

चित्र मे राजन भारत केसरी पहलवान अपने पिता श्री सुदेश कुमार के साथ 
रविन्द्र शामली 

कुस्ती जगत  

Thursday, January 17, 2019

मोहित भीम पहलवान (किगं) साक्षात्कार

रविन्द्र शामली -  आपको अकेले बहुत सारे निजी कार्य भी देखने होते है। अखाडे के लिये समय निकालना कितना मुशकिल होता है ? 

मोहित भीम पहलवान-  जब आदमी दिल से किसी कार्य को सोचता है तो हो ही जाता है। उसमे समय निकालना ही क्यो ना हो , निकल ही जाता है। फिर वो आदत हो  जाती है , कि ये कार्य करना है तो करना ही है। 

रविन्द्र शामली - आप अपने अखाडे के कुछ बच्चो का खर्च तक उठाते है। यह ताकत , यह प्रेरणा  कहॉ  से मिली ?

मोहित भीम पहलवान- ये सब पिताजी के बनाये रास्ते है। पिताजी तो अपनी सारी तनखा तक पहलवानो पर खर्च कर देते थे । थोडा बहुत हमसे भी जो बनता है हम भी करते है। इस सबसे बच्चो मे थोडा उत्साह पैदा होता है।  

रविन्द्र शामली - सरकार को क्या कदम उठाने चाहिये जिससे कुस्ती का  वास्तविक विकास हो सके ?

मोहित भीम पहलवान- जो भी पुराने अखाडे है उनकी जो भी छोटी मोटी समस्या है वे दूर करदे और उनके नवीनिकरण मे सरकार सहयोग करे तो मुझे लगता है। हम बहुत आगे जा सकते है इस क्षेत्र मे । 

रविन्द्र शामली -अपने पिताजी के बारे मे संक्षेप मे बताये कैसे थे ? भीम पहलवान जी  

मोहित भीम पहलवान- जीवो से बडा लगाव था पिताजी को अखाडे मे भी कुत्ते बिल्लीयो को भी खुब दुध पिलाते थे । लोग कहते है आज भी के कुस्ती के दिवाने थे भीम पहलवान जी । 

रविन्द्र शामली - आपकी बहन कहती है कि हर बहन को मोहित किगं जैसा भाई मिले । आप क्या कहेगे ?

मोहित भीम पहलवान- अच्छा लगता है। वैसे  मै तो अपना फर्ज निभाता हू , और कहना चहाता हू आपके माध्यम से हर इनसान को अपना फर्ज निभाना चाहिये जो अपना फर्ज नही निभा सकता वह कैसा इन्सान  

रविन्द्र शामली - खेल की बात करे तो कितना मुशकिल है ?

मोहित भीम पहलवान-  मुश्किल तो बहुत है दुनिया मे हर चीज मुश्किल है , अब तो  खेती किसानी से लेकर दो वक्त की रोटी , नौकरी का इंतजाम भी मुश्किल ही है। आसान कुछ नही रहा । दुनिया मे जीना है तो संघर्ष करना ही है। बिना फल की इच्छा के जो मिले ठीक है , ना मिले तो भी ठीक 

रविन्द्र शामली - माताजी सरस्वती जी के बारे मे थोडा  सा बताईये ?

मोहित भीम पहलवान- मेरी माता जी सरस्वती महलावत बहुत मजबूत महिला है। बहुत उतार चढाव उन्होने देखे है।  फिर भी उन्होने कभी भी किसी चीज की कोई कमी हमे महसूस नही होने दी । महिला होते हुये अखाडे का संचालन करने से कभी पीछे नही हटी । एक तरह से कहु कि मेरी मॉ ने  पढाई का क्षेत्र हो , पारिवारिक जिम्मेदारीया हो , नौकरी हो , अखाडा संचालन हो उन्होने अपने आप को हर जगह अब्बल साबित किया है। 

रविन्द्र शामली - वर्तमान मे कौन सी समस्या सबसे जटिल है।  सामाजिक स्तर की बात करे तो ?

मोहित भीम पहलवान- बढती जनसंख्या बहुत सारी समस्याओ की जड है। बोट की राजनीति से उपर उठकर सरकार को इसका हल सोचना चाहिये । 


साक्षात्कार कर्ता 
रविन्द्र शामली 
कुस्ती जगत 

Wednesday, January 9, 2019

विरासत मे मिली चमक पर खरा उतरना ही लक्ष्य - अमित ढाका


रविन्द्र शामली - अमित जी 19, 20, 21 जनवरी 2019 मे आपके अखाडे मे जो आयोजन हो रहा है। क्या क्या तैयारी हो रही है ?

अमित ढाका - आयोजन को सफल बनाने के उदृदेश्य से  बहुत सारी तैयारी की जा रही है। अधिकतर कार्य हमने अपने स्तर पर पूरा कर लिया है। जो बाकी है उसे भी जल्द पूरा करलेगे ।

रविन्द्र शामली - क्या कभी बचपन मे सोचा था कि मै द्रोणाचार्य कैप्टन चॉदरूप अखाडे का संचालक बनूगां ?

अमित ढाका - नही कभी नही सोचा एसा मैने , मै अपने दादा जी का हाथ बटाया करता था । दादा जी और पिताजी के बाद एकदम से सारी जिम्मेदारीयॉ मेरे कन्धो पर आ गई ।

रविन्द्र शामली - अखाडे मे किन बुनियादी सुविधाओ की जरूरत है ?

अमित ढाका -  वैसे तो कई बुनियादी सुविधाओ की दरकार है। धीरे धीरे हम अपने दम पर ज्यादा से ज्यादा 
 सुविधाये अपने बच्चो को दे रहे है । हम  अपने आप कमाते भी है , और अपने अखाडे पर लगाते  भी है। 

रविन्द्र शामली - विरासत मे मिली अखाडे की कुर्सी का दायित्व  निभाना  कितना मुश्किल था  ?

अमित ढाका - मेरे लिये यह सब बहुत मुश्किल था । दादा जी ने और पिताजी ने इस अखाडे को अपने पशीने से सीचा था । सच कहू तो यह अखाडा  उनके जीवन भर के काम और नाम की पृष्ठभूमि था । मेरे लिये गलती करने का कोई मौका ही नही था । मै नही चहाता था कि मै कोई गलती करू और लोग कहे कि दादा और पिताजी ने जो नाम कमाया था वो पोते ने खत्म कर दिया । मेरा मुख्य  लक्ष्य रहा , इस विरासत पर खरा उतरना और इस विरासत को आगे बढाना । 

रविन्द्र शामली - आज के अमित ढाका और जब जिम्मेदारीयॉ आप पर नही थी उस अमित ढाका मे क्या अन्तर महसूस करतें है ?

अमित ढाका - जब जिम्मेदारीयॉ नही थी तो खूब मौज मस्ती किया करते थे । अब तो काम से ही फुर्सत नही होती । सच तो ये है जो समय बीत गया वो तो आ ही नही सकता । संसार का नियम है आगे बढते जाना ही है। 

रविन्द्र शामली - वास्तविकता भी है। यदि आज मै आपको अमित ढाका नही ,  गुरू अमित ढाका कहू तो क्या कहोगे ? 

अमित ढाका - कभी कभी आपकी इस तरह की बातो से मुझे डर सा लगता है। (हसते हुये ) गुरू जी तो कैप्टन सहाब ही थे वे ही रहेगे , हम तो जब भी सेवक थे आज भी सेवक बनकर ही अपनी सेवा देने मे विश्वास रखते है।

रविन्द्र शामली - अमित भाई जीवन मे उतार चढाव हर किसी के सामने आते है। श्री राम को भी बनवास भोगना पडा था । आपने  भी बहुत बडे भारी उतार चढाव जीवन मे देखे है ,  फिर भी वो कौन सी बात है। जिसे सोचकर ही दिल खुश हो जाता है ?

अमित ढाका - मेरे लिये तो गर्व की बात यही है कि मैने अपने दादा जी के परिवार मे जन्म लिया । पिताजी के संघर्षो को देखा ,कुस्ती सम्राट  दादा जी चॉदरूप के साथ समय बिताया यह भी सौभाग्य है हमारा । 

रविन्द्र शामली - अखाडे मे कैप्टन सहाब से जुडी वस्तुओ का संग्राहल्य होना तो चहिये , आप क्या कहोगे ? 

अमित ढाका - बिलकुल होगा रविन्द्र भाई आप चिन्ता ना करे ये वादा है आपसे मेरा बिलकुल होगा । 

रविन्द्र शामली - आपके अखाडे का भारत तो दूर दुनिया मे नाम है। बहुत समय से आप सेवाये दे रहे है। अखाडे से जुडी कौन सी विषय वस्तु है जो दिल दुखा जाती है ?

अमित ढाका - जब किसी बच्चे पर बहुत मेहनत की जाती है और वो बच्चा अखाडा  छोडकर किसी लालच मे दूसरे अखाडे  मे चला जाता है। तो एसी घटनाये दिल दुखा जाती है। हालाकि अब इन बातो का हम पर ज्यादा असर नही होता । लगता है ये तो होता ही रहता है।

रविन्द्र शामली - क्या अच्छा लगता है ?

अमित ढाका - समाज के लिये आने वाली नश्लो के लिये कुछ अच्छा कर गुजरना 

रविन्द्र शामली - खाने मे क्या पसंद है ? 

अमित ढाका - बहुत सारे कार्य करने के लिये बहुत सारी उर्जा की जरूरत होती है। मै सूखी मेवा , दूध , दही , फल , और बहुत सारा जूस पसंद करता हू । 

रविन्द्र शामली - जूश बहुत सारा मतलब कितना ?

अमित ढाका - दिन मे चार  लीटर । 

यह थे श्री अमित ढाका जी , जो कुस्ती कोच श्री रणबीर सिंह ढाका के बेटे व कुस्ती सम्राट द्रोणाचार्य कैप्टन चॉदरूप जी  के पोते है। वर्तमान मे श्री अमित ढाका जी  कुस्ती सम्राट कैप्टन चॉदरूप द्रोणाचार्य अखाडा के संचालक है।


साक्षातकार कर्ता 
रविन्द्र  शामली 
कुस्ती जगत 

Sunday, January 6, 2019

परिश्रम और संयम जीवन मे जरूरी - : शहनवाज मिर्जा

देश की धडकन , देश की शान , युवाओ के प्रेरणा श्रोत , आईरन मैन , मिस्टर दिल्ली , मिस्टर इण्डिया , मिस्टर एशिया , मिस्टर वर्ल्ड श्री शहनवाज मिर्जा से हुई खास मुलाकात के मुख्य अशं ---------------


रविन्द्र शामली - बोडीबिल्डिगं मे कैसे आये ?
शहनवाज मिर्जा - पता ही नही चला बचपन मे तो नही सोचा था की मै बॉडी बिल्डर बनूगॉ मैने क्रीकेट भी खेला, तैराकी भी की , दूसरे खेल भी खेलता रहा । फिट रहने के लिये जिम किया करता । कुछ लोगो का घर परिवार का साथ मिलता गया और मे एक बॉडी बिल्डर बन गया ।
रविन्द्र शामली - आपका जन्म कब और कहॉ पर हुआ ?
शहनवाज मिर्जा - मेरा जन्म दिल्ली मे ही हुआ 13-01-1984 मे दिल्ली मे ही पला बडा हुआ । आप कह सकते है कि मैने दिल्ली को करीब से देखा इन सालो मे ।
रविन्द्र शामली - आपके बचपन से लेकर अब तक दिल्ली कितना बदल गई मिर्जा सहाब ?
शहनवाज मिर्जा - बहुत कुछ बदल गया है। गगन गगनचुंबी इमारते , फ्लाईओवर , सडके बहुत कुछ बदल गया है। लोग भी धीरे धीरे बदल रहे है। पहले सब एक साथ बैठते थे l आज किसी के पास फोन के अलावा समय नही है। मै तो आपके माध्यम से कहना चाहूगॉ युवाओं को कि अपने मॉ बाप के पास दो घडी बैठा करो , समय निकाला करो । जो मॉ बाप के लिये भी समय नही निकाल पाता उसका तो उपर वाला भी भला नही कर सकता ।
रविन्द्र शामली - आज आप स्टारडम के शिखर पर है। किसका हाथ मानते है। अपनी सफलता मे ?
शहनवाज मिर्जा - हाथ तो उपर वाले का ही होता है हर किसी की सफलता मे बाकी अपनी महनत और परिश्रम होता है। गुरू , कोच अपने जो टरेनर उनका भी बहुत बडा योगदान होता है। मॉ बाप का भी योगदान , परिवार का योगदान भी दरकिनार नही किया जा सकता है। खुराक पर बहुत खर्च आता है। परिवार के सदस्य अपने खर्चो को कम करते है। तब जाकर कोई भी खिलाडी हो वो आगे बढता है।
रविन्द्र शामली - आपको पहली बडी सफलता कब मिली ?
शहनवाज मिर्जा - साल 2000 मे मै मिस्टर दिल्ली बना , उसके बाद मैने पीछे मुडकर नही देखा । 2007 मे और 2010 मे मैने वाई एम सी मे देश के लिये गोल्ड मेडल प्राप्त किया । , 2013 मे और 2014 मे मैने फिर मिस्टर दिल्ली का खिताब अपने नाम किया था , इसके बाद मैने 2014 मे एक बार फिर नोर्थ इण्डिया मे गोल्ड प्राप्त कर अपने आप को साबित किया । जस्ट अगले साल मैने 2015 मे मिस्टर इण्डिया का खिताब अपने नाम किया । इसके बाद साल 2018 मे मैने मिस्टर इण्डिया का खिताब अपने नाम किया । साल 2018 मेरे लिये बडा शानदार रहा इसी साल मे मैने दो और बडी चैम्पियनशिप मे भाग लिया जौलाई के महीने मे फिलीफिन्स के अन्दर मिस्टर वर्ल्ड के नाम से चैम्पियनशिप हुई जिसमे बियालिश (42) देशो के बॉडी बिल्डर आये थे l जहॉ मुझे ब्रोन्ज मेडल प्राप्त हुआ ।
इसी साल मैने मिस्टर यूनिवर्स मे हिस्सा लिया जहॉ पर बावन (52) देशो के बॉडी बिल्डर आये थे , वहा पर मैने सिलवर मेडल प्राप्त किया ।
रविन्द्र शामली -सबसे बडी खुशी का लम्हा आपको कब लगा ?
शहनवाज मिर्जा -जब जब मै विक्टिस स्टैंड पर मेडल के साथ खडा होता हू तिरंगा लहराने का अवशर उस समय हमे लिता है। वही ये लम्हा होता है। मुझे लगता हर खिलाडी के लिये यह लम्हा बेहद शानदार होता है l
रविन्द्र शामली - अपने परिवार के बारे मे भी थोडा सा बताईये मिर्जा सहाब ?
शहनवाज मिर्जा - मेरे पिता का नाम श्री मिर्जा इश्तकार अली और माता का नाम रशीदा मिर्जा है। हम चार भाई है। हमारी एक बहन है।
रविन्द्र शामली - कितने समय आप वर्क आउट करते है ?
शहनवाज मिर्जा - अब मै दो घंटे सुबह दो घंटे शाम वर्कआउट करता हू । पहले ज्यादा भी किया है।
रविन्द्र शामली - कैसी डाईट पसंद है आपको ?
शहनवाज मिर्जा - जिसमे प्रोटीन ज्यादा हो बस
रविन्द्र शामली - आप किस कम्पनी की ब्राण्डिगं करते है?
शहनवाज मिर्जा - पी0एस0एन0 का मै ब्राण्ड एबेसेडर हू । यह कम्पनी खिलाडियो के लिये फूड सपलिमेन्ट बनाती है।
रविन्द्र शामली - स्टारडम क्या है ?
शहनवाज मिर्जा - जब कोई भी व्यक्ति लोगो के दिलो पर राज करे वही स्टारडम है। सुरूवात मे हर कोई चहाता है कि मुझे लोग जाने जितना मुशकिल स्टारडम प्राप्त करना है। उससे कई गुना मुशकिल स्टारडम को सम्भालकर रखना होता है।
रविन्द्र शामली -युवाओ को क्या संदेश देना चाहोगे ?
शहनवाज मिर्जा - सफलता का कोई सोर्टकट नही है। सफलता को प्राप्त करने के लिये लगातार परिश्रम की जरूरत होती है। लगातार परिश्रम करो किसी भी क्षेत्र मे करो , सफलता मिलती है। शोर्टकट मारने वाले अक्षर मार खा जाते है। परिश्रम का फल ज्यादा सकून देने वाला होता है।

साक्षातकार कर्ता 
रविन्द्र शामली
कुस्ती जगत

Friday, December 21, 2018

मोहित किगं जैसा भाई किस्मत से मिलता है। - डा0 रचिता महलावत


एक मुलाकात डा0 रचिता महलावत से -
डा 0 रचिता महलावत कुस्ती रत्न गुरू भीम पहलवान जी की बेटी है।

प्रश्न-1 रचिता जी आप बचपन से ही डाक्टर बनना चहाती थी या कोई और सपना था ?

उत्तर- मेरा बचपन से ही डाक्टर बनने का ही सपना था क्योकि पिताजी मुझे डाक्टर बनते हुये देखना चहाते थे मै पिताजी का सपना पूरा करना चहाती थी आज मै बहुत खुश हू कि मैने पिताजी का सपना पुरा किया

प्रश्न-2 रचिता जी वास्तव मे किस दिन लगा आपको की आज पिताजी का सपना पूरा हो गया ?

उत्तर - एक्चुली  सच बताऊ आपको 24 अगस्त 2018 को मेरे क्लीनिक का उदघाटन हुआ हवन पूजन के बाद यहि वो दिन था  जब मुझे लगा कि पिताजी का सपना पूरा हो गया

प्रश्न-3 गुरू जी भीम पहलवान (कुस्ती रत्न) पहलवान होने के साथ साथ एक समाज सेवी इंसान थे। जो अब हमारे बीच नही है। उनकी किन बातो का आप पर प्रभाव पडा ?

उत्तर - पिताजी के साथ बिताया हर  पल मुझे आज भी याद है। पिताजी की शिक्षा का ही असर है। या कहो की उन्ही से प्रभावित होकर मै सोसाईटीज मे फ्री डेंटल मेडिकल चेकअप कैम्प लगाती हू


प्रश्न-4 अपनी मम्मी के साथ बचपन की कोई याद जो आपको आज भी याद हो शेयर करना चाहोगी ?

उत्तर - हॉ क्यो नही बचपन मे मुझे मम्मी स्कूल से लेकर आया करती मुझे आज भी याद है। जब स्कूल से छुटृटी का समय होता तो मेरी नजरे  मम्मी को ढूंढती रहती थी। मुझे जैसे ही मम्मी दिखाई देती मै अपना बैग उठा लेती ये ऐसी यादे है जिनमे वापिश तो नही जाया जा सकता  , पापा के जाने के बाद मम्मी ने हमे सम्भाला कभी कोई कमी नही होने दी मेरी कामयाबी मे मम्मी का अहम रोल रहा ,  शादी के बाद भी मम्मी मुझे सपोर्ट करती है।

प्रश्न-5 आपका भाई मोहित किगं जिसमे समाज सेवा कूट कूट कर भरी हुई है। मै चाहूगा आप मोहित के मारे मे भी कुछ बाते शेयर करे ?

उत्तर -मै मोहित किगं से पॉच साल छोटी हू मोहित किगं मुझसे उम्र मे बडा है। मोहित किगं ने मेरी सभी ख्वाहिसे पूरी की है। सच बताऊ तो मै मोहित किंग को भाई के रूप मे नही बल्कि पिता के रूप मे देखती हू मेरे भाई के पास दो बच्चे है। लेकिन मुझे लगता है उसके पास तीन बच्चे है। जिनमे एक मै हू मुझे लगता है मोहित किगं दुनिया का सबसे अच्छा भाई है। मै तो चहाती हू कि हर बहन को मोहित किगं जैसा भाई मिले

प्रश्न-6 रचिता जी आप दॉतो की डाक्टर है। मै जानना चहाता हू की आम आदमी क्या करे जिससे  वो अपने दॉतो की हिफाजत कर सके ?

उत्तर - सुबह शाम दंत मंजन करना चहिये हर छः महीने के बाद अपने दॉतो का चेक अप जरूर करवाये खाना खाने के बाद माउथ वाश का प्रयोग करे मीठा कम खाये , यदि खाये तो भोजन के साथ खाये खाने के बाद इण्टर डेन्टल ब्रुश का प्रयोग करे जिस मौसम मे जो फल उपलब्ध हो उनहे अपनी डाईट मे शामिल करे

प्रश्न-7 आपके कलिनिक की कोई ऐसी विशेषता जो आपको औरो से अलग खड़ा करती है ?

उत्तर - किसी भी खेल का खिलाडी महिला हो या पुरूष , उसे हमारे यहॉ इलाज और चैक अप मे विशेष दूट दी जाती है।

प्रश्न-8 दॉतो से जुडा वो कौन सा क्षेत्र है।  जिसमे आज भी लोग  जागरूक  दिखाई नही देते क्या कहोगी ?

उत्तर -बच्चो के दूध के दॉतो के प्रति आज भी लोग जागरूक नही है। ऐसा नही होना चाहिये हर माता पिता को अपने बच्चो के दातो का चेक अप जरूर करवाना चहिये


साक्षातकार कर्ता
रविन्द्र शामली
कुस्ती जगत